शासक, अधिकारी और धर्मगुरु
गमलीएल
फरीसी और व्यवस्था का शिक्षक
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- घटनाएँ
- 1
- स्थान
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- यात्राएँ
संपादकीय सारांश
महासभा का एक फरीसी, जिसका सब लोग आदर करते थे। उसने महासभा को सलाह दी कि वे प्रेरितों से कुछ काम न रखें, क्योंकि जो काम मनुष्यों की ओर से हो, वह मिट जाएगा, पर जो परमेश्वर की ओर से हो, उसे कोई मिटा नहीं सकेगा।
पवित्रशास्त्र
यात्राएँ
2इनकी कहानी कहाँ घटित हुई
1वचन में उल्लेख
1प्रेरितों का छुटकारा और गमलीएल की सलाह
महायाजक और सदूकियों ने प्रेरितों को बन्दीगृह में डाल दिया, पर रात को एक स्वर्गदूत ने बन्दीगृह के द्वार खोल दिए, और भोर होते ही वे मन्दिर में उपदेश दे रहे थे। महासभा के सामने पतरस और अन्य प्रेरितों ने कहा कि मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्वर की आज्ञा मानना ही उनका कर्तव्य है। गमलीएल नामक एक फरीसी ने सलाह दी कि प्रेरितों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाए; तब उन्हें पिटवाकर छोड़ दिया गया।