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नगर

दमिश्क

प्राचीन नाम
दमिश्क
आज का स्थान
दमिश्क · सीरिया
स्थान
पहचाना हुआ स्थल

संपादकीय सारांश

शाऊल इस पंथ के लोगों को पकड़ने के लिए चिट्ठियाँ लेकर दमिश्क के निकट पहुँच रहा था, कि अचानक आकाश से एक ज्योति उसके चारों ओर चमकी। नगर में हनन्याह ने उस पर हाथ रखे, और शाऊल आराधनालयों में प्रचार करता रहा। अन्त में उसे टोकरे में बैठाकर शहरपनाह पर से उतारा गया, और वह बच निकला।

यहाँ क्या हुआ

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  1. दमिश्क के मार्ग पर शाऊल

    शाऊल महायाजक की चिट्ठियाँ लेकर दमिश्क के निकट पहुँच रहा था, ताकि इस पंथ के लोगों को बाँधकर यरूशलेम ले आए; तभी आकाश से उसके चारों ओर ज्योति चमकी, और एक वाणी ने उससे कहा कि बोलनेवाला यीशु है, जिसे वह सता रहा है। देख न पाने की दशा में उसे नगर में ले जाया गया, और तीन दिन तक उसने न कुछ खाया और न पिया।

    प्रेरितों के काम के अनुसार यह तब हुआ जब शाऊल दमिश्क के निकट पहुँचा; मार्ग पर उस स्थान का नाम नहीं बताया गया।

    पौलुस का मन-परिवर्तन · पड़ाव 2
  2. हनन्याह ने शाऊल पर हाथ रखे

    प्रभु ने दर्शन में दमिश्क के एक चेले हनन्याह को सीधी नामक गली में यहूदा के घर शाऊल के पास भेजा। हनन्याह ने शाऊल की बुराइयों के विषय में सुन रखा था, फिर भी वह गया और उसने उस पर हाथ रखे; शाऊल की आँखों से छिलके जैसा कुछ गिरा, वह फिर देखने लगा और उसने बपतिस्मा लिया।

    पौलुस का मन-परिवर्तन · पड़ाव 3
  3. दमिश्क की शहरपनाह से बच निकलना

    दमिश्क में शाऊल तुरन्त आराधनालयों में यीशु मसीह का प्रचार करने लगा कि वह परमेश्वर का पुत्र है, और वहाँ रहनेवाले यहूदियों का मुँह बन्द करता रहा। बहुत दिन बीतने पर उसे मार डालने की युक्ति रची गई और फाटकों की रात-दिन निगरानी होने लगी, पर उसके चेलों ने उसे टोकरे में बैठाकर शहरपनाह से नीचे उतार दिया।

    पौलुस का मन-परिवर्तन · पड़ाव 3
  4. अरब जाना और दमिश्क लौटना

    गलातियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस लिखता है कि जब परमेश्वर ने उसमें अपने पुत्र को प्रगट किया, तब उसने न तो तुरन्त किसी से सलाह ली और न यरूशलेम को प्रेरितों के पास गया, परन्तु अरब को चला गया और फिर दमिश्क लौट आया।

    पौलुस यह नहीं बताता कि वह अरब में कहाँ गया या वहाँ कितने समय तक रहा। यह उसका अपना विवरण है; प्रेरितों के काम 9 में अरब का उल्लेख नहीं है।

यहाँ कौन-कौन था

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यहीं के निवासी

इन यात्राओं में

पवित्रशास्त्र

स्थान की निश्चितता

विद्वानों में आम सहमति है कि यही वह स्थल है।

निर्देशांक
33.5111° उत्तर, 36.3064° पूर्व