सुसमाचारों के अन्य लोग
यूसुफ
मरियम का पति, जो दाऊद के घराने का था
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- घटनाएँ
- 4
- स्थान
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- यात्राएँ
संपादकीय सारांश
लूका बताता है कि वह नाम लिखवाने के लिए बैतलहम गया; मत्ती बताता है कि वह बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र गया, और बाद में नासरत में जा बसा।
पवित्रशास्त्र
यात्राएँ
1इनकी कहानी कहाँ घटित हुई
4वचन में उल्लेख
8मिस्र को भागना
स्वप्न में यह चेतावनी पाकर कि हेरोदेस बालक के प्राण लेने के लिए उसे ढूँढ़ेगा, यूसुफ रात ही को बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र चला गया, और वे हेरोदेस की मृत्यु तक वहीं रहे।
नासरत में बस जाना
हेरोदेस की मृत्यु के बाद यूसुफ परिवार को लेकर इस्राएल के देश में लौट आया। यहूदिया पर राज्य करनेवाले अरखिलाउस से डरकर वह गलील चला गया और नासरत में बस गया।
मरियम को स्वर्गदूत का सन्देश
नासरत में गब्रिएल स्वर्गदूत ने कुँवारी मरियम से, जिसकी मंगनी यूसुफ से हुई थी, कहा कि वह गर्भवती होगी, एक पुत्र को जन्म देगी और उसका नाम यीशु रखेगी।
बैतलहम में जन्म
औगुस्तुस कैसर ने लोगों के नाम लिखे जाने की आज्ञा दी थी, और इसी कारण यूसुफ और मरियम नासरत से दाऊद के नगर बैतलहम आए। वहाँ मरियम ने अपने पहलौठे पुत्र को जन्म दिया और उसे चरनी में रखा, क्योंकि सराय में जगह नहीं थी।
गड़ेरियों ने समाचार सुना
रात को अपने झुण्ड का पहरा दे रहे गड़ेरियों को एक स्वर्गदूत ने बालक के जन्म का समाचार सुनाया। उन्होंने जल्दी से बैतलहम जाकर मरियम और यूसुफ को, और चरनी में पड़े बालक को पाया।
मन्दिर में समर्पण
मरियम और यूसुफ बालक को प्रभु के सामने प्रस्तुत करने के लिए यरूशलेम ले गए। मन्दिर में धर्मी शमौन ने उसे अपनी गोद में लेकर परमेश्वर की स्तुति की, और भविष्यद्वक्तिन हन्नाह ने परमेश्वर का धन्यवाद किया और उसके विषय में बातें कीं।
नासरत को लौटना
व्यवस्था के अनुसार जो कुछ करना आवश्यक था, वह सब करके वे गलील में अपने नगर नासरत को लौट गए। वहाँ बालक बलवन्त और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया।
मन्दिर में बालक यीशु
जब यीशु बारह वर्ष का था, तब फसह के पर्व के बाद वह यरूशलेम में ही रह गया। तीन दिन के बाद उसके माता-पिता ने उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच पाया, जहाँ वह उनकी सुन रहा था और उनसे प्रश्न कर रहा था।