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सीरिया · नगर

अन्ताकिया

प्राचीन नाम
अन्ताकिया
आज का स्थान
अंताक्या · तुर्की
क्षेत्र
सीरिया
स्थान
पहचाना हुआ स्थल

संपादकीय सारांश

रोमी प्रान्त सीरिया का एक बड़ा नगर, जहाँ चेले सबसे पहले मसीही कहलाए। यहीं बरनबास और शाऊल को उनकी पहली यात्रा के लिए अलग किया गया, और पौलुस अपनी यात्राओं के बीच यहाँ लौट आता था।

यहाँ क्या हुआ

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  1. वचन अन्ताकिया तक पहुँचा

    स्तिफनुस के कारण आरम्भ हुए सताव से तितर-बितर हुए विश्वासी फीनीके, साइप्रस और अन्ताकिया तक पहुँचे, पर वे केवल यहूदियों को वचन सुनाते थे। परन्तु साइप्रस और कुरेने के कुछ लोग अन्ताकिया में आकर यूनानी भाषा बोलनेवालों को भी प्रभु यीशु के विषय में बताने लगे, और बहुत से लोगों ने विश्वास किया।

    प्रेरितों के काम में फीनीके या साइप्रस के उन नगरों के नाम नहीं बताए गए जहाँ वचन सुनाया गया।

  2. अन्ताकिया में चेले पहली बार मसीही कहलाए

    यरूशलेम की कलीसिया ने बरनबास को अन्ताकिया भेजा, और उसने विश्वासियों को उपदेश दिया कि वे प्रभु से लिपटे रहें। फिर वह शाऊल को ढूँढ़ने तरसुस गया और उसे अन्ताकिया ले आया, जहाँ वे पूरे एक वर्ष तक बहुत से लोगों को उपदेश देते रहे। चेले सबसे पहले अन्ताकिया में ही मसीही कहलाए।

    पौलुस का मन-परिवर्तन · पड़ाव 7
  3. अगबुस ने अकाल की भविष्यद्वाणी की

    कुछ भविष्यद्वक्ता यरूशलेम से अन्ताकिया आए, और उनमें से अगबुस ने आत्मा की प्रेरणा से बताया कि सारे जगत में बड़ा अकाल पड़ेगा; यह अकाल क्लौदियुस के समय में पड़ा। तब चेलों में से हर एक ने अपनी-अपनी पूँजी के अनुसार यहूदिया में रहनेवाले भाइयों के लिए सहायता भेजी, जो बरनबास और शाऊल के हाथ प्राचीनों के पास पहुँचाई गई।

    भविष्यद्वाणी और सहायता भेजने का निर्णय, दोनों अन्ताकिया में हुए; प्रेरितों के काम में लिखा है कि सहायता यहूदिया के भाइयों के लिए प्राचीनों के पास भेजी गई, पर किसी नगर का नाम नहीं दिया गया।

    पौलुस का मन-परिवर्तन · पड़ाव 7
  4. बरनबास और शाऊल भेजे गए

    जब अन्ताकिया की कलीसिया के भविष्यद्वक्ता और उपदेशक उपवास सहित प्रभु की उपासना कर रहे थे, तब पवित्र आत्मा ने बरनबास और शाऊल को अलग करने के लिए कहा। उपवास और प्रार्थना के बाद उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्हें विदा किया।

    पहली यात्रा · पड़ाव 1
  5. कलीसिया को वृत्तांत सुनाना

    अन्ताकिया लौटकर उन्होंने कलीसिया को इकट्ठा किया और बताया कि परमेश्वर ने किस प्रकार अन्यजातियों के लिए विश्वास का द्वार खोल दिया था। वे वहाँ बहुत दिन तक रहे।

    पहली यात्रा · पड़ाव 15
  6. अन्ताकिया में खतने पर विवाद

    यहूदिया से आए कुछ लोगों ने भाइयों को सिखाया कि यदि मूसा की रीति के अनुसार उनका खतना न हो, तो वे उद्धार नहीं पा सकते। बहुत विवाद के बाद यह ठहराया गया कि पौलुस, बरनबास और कुछ अन्य लोग इस प्रश्न को लेकर यरूशलेम में प्रेरितों और प्राचीनों के पास जाएँ।

    प्रेरितों के काम 15:1 में नगर का नाम नहीं है; पौलुस और बरनबास अन्ताकिया में रह रहे थे (प्रेरितों के काम 14:26–28), और सभा का उत्तर वहीं भेजा गया (प्रेरितों के काम 15:22–23)।

  7. अन्ताकिया में पत्री का सौंपा जाना

    अन्ताकिया में संदेशवाहकों ने विश्वासियों को इकट्ठा करके पत्री सौंप दी, और विश्वासी उसके प्रोत्साहन से आनन्दित हुए। यहूदा और सीलास ने, जो भविष्यद्वक्ता थे, भाइयों को प्रोत्साहित करके स्थिर किया, और कुछ समय बाद वे शान्ति के साथ लौटने के लिए विदा किए गए; पर पौलुस और बरनबास अन्ताकिया में ही रहकर प्रभु के वचन का उपदेश देते और प्रचार करते रहे।

  8. पौलुस और बरनबास अलग हुए

    पौलुस ने सुझाव दिया कि जिन-जिन नगरों में उन्होंने प्रचार किया था, उन सब में फिर से जाएँ। यूहन्ना मरकुस को साथ ले जाने के विषय में ऐसा तीखा विवाद हुआ कि बरनबास मरकुस को लेकर जहाज से साइप्रस चला गया, जबकि पौलुस सीलास को चुनकर सीरिया और किलिकिया से होता हुआ गया।

    दूसरी यात्रा · पड़ाव 1
  9. अन्ताकिया को वापसी

    पौलुस अन्ताकिया को गया और फिर से यात्रा पर निकलने से पहले कुछ समय वहीं रहा।

    दूसरी यात्रा · पड़ाव 18
  10. फिर यात्रा पर

    पौलुस अन्ताकिया से चल पड़ा और क्रम से गलातिया और फ्रूगिया के क्षेत्र में से होता हुआ सब चेलों को स्थिर करता गया।

    तीसरी यात्रा · पड़ाव 1

यहाँ कौन-कौन था

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इन यात्राओं में

पवित्रशास्त्र

एटलस में आस-पास

स्थान की निश्चितता

विद्वानों में आम सहमति है कि यही वह स्थल है।

निर्देशांक
36.2267° उत्तर, 36.1717° पूर्व