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पौलुस और उसके साथी · आरंभिक कलीसिया

बरनबास

अन्य नाम: यूसुफ

पहली यात्रा में पौलुस का साथी

23
घटनाएँ
14
स्थान
5
यात्राएँ

संपादकीय सारांश

साइप्रस का एक लेवी, जिसका नाम यूसुफ था और जिसे प्रेरितों ने बरनबास नाम दिया। वह शाऊल को यरूशलेम में प्रेरितों के पास ले गया, और बाद में तरसुस से अन्ताकिया ले आया; वहीं उसे शाऊल के साथ पहली यात्रा के लिए अलग किया गया। यूहन्ना मरकुस के विषय में तीखा विवाद होने के बाद वह मरकुस को साथ लेकर जहाज से साइप्रस चला गया।

पवित्रशास्त्र

यात्राएँ

5

इनकी कहानी कहाँ घटित हुई

14

निवासी: साइप्रस ()

वचन में उल्लेख

23
  1. बरनबास ने अपना खेत बेचा

    साइप्रस के एक लेवी यूसुफ ने, जिसे प्रेरित बरनबास (अर्थात् शान्ति का पुत्र) कहते थे, अपना एक खेत बेचा और उसका दाम लाकर प्रेरितों के पाँवों पर रख दिया।

  2. यरूशलेम में प्रेरितों के साथ शाऊल

    जब शाऊल यरूशलेम आया, तो चेले उससे डरते थे, पर बरनबास ने उसे प्रेरितों के पास ले जाकर बताया कि शाऊल ने मार्ग में किस रीति से प्रभु को देखा था और दमिश्क में कैसे साहस से प्रचार किया था। शाऊल उनके साथ रहकर निडर होकर प्रचार करता और यूनानी भाषा बोलनेवाले यहूदियों से वाद-विवाद करता रहा, जो उसे मार डालने का यत्न कर रहे थे।

  3. अन्ताकिया में चेले पहली बार मसीही कहलाए

    यरूशलेम की कलीसिया ने बरनबास को अन्ताकिया भेजा, और उसने विश्वासियों को उपदेश दिया कि वे प्रभु से लिपटे रहें। फिर वह शाऊल को ढूँढ़ने तरसुस गया और उसे अन्ताकिया ले आया, जहाँ वे पूरे एक वर्ष तक बहुत से लोगों को उपदेश देते रहे। चेले सबसे पहले अन्ताकिया में ही मसीही कहलाए।

  4. अगबुस ने अकाल की भविष्यद्वाणी की

    कुछ भविष्यद्वक्ता यरूशलेम से अन्ताकिया आए, और उनमें से अगबुस ने आत्मा की प्रेरणा से बताया कि सारे जगत में बड़ा अकाल पड़ेगा; यह अकाल क्लौदियुस के समय में पड़ा। तब चेलों में से हर एक ने अपनी-अपनी पूँजी के अनुसार यहूदिया में रहनेवाले भाइयों के लिए सहायता भेजी, जो बरनबास और शाऊल के हाथ प्राचीनों के पास पहुँचाई गई।

  5. बरनबास और शाऊल का यूहन्ना मरकुस को साथ लेना

    कुछ हस्तलिपियों के अनुसार बरनबास और शाऊल अपनी सेवा पूरी करके यूहन्ना को, जो मरकुस कहलाता है, साथ लेकर यरूशलेम को लौटे। IRV हिन्दी में यहाँ लिखा है कि वे “यरूशलेम से लौटे”।

  6. बरनबास और शाऊल भेजे गए

    जब अन्ताकिया की कलीसिया के भविष्यद्वक्ता और उपदेशक उपवास सहित प्रभु की उपासना कर रहे थे, तब पवित्र आत्मा ने बरनबास और शाऊल को अलग करने के लिए कहा। उपवास और प्रार्थना के बाद उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्हें विदा किया।

  7. जहाज से साइप्रस की ओर

    बरनबास और शाऊल सिलूकिया को गए और वहाँ से जहाज पर चढ़कर साइप्रस को चले।

  8. सलमीस के आराधनालयों में प्रचार

    सलमीस में उन्होंने यहूदियों के आराधनालयों में परमेश्वर का वचन सुनाया; यूहन्ना सहायक के रूप में उनके साथ था।

  9. हाकिम ने विश्वास किया

    पाफुस में एलीमास जादूगर ने हाकिम सिरगियुस पौलुस को विश्वास से फेरने का प्रयत्न किया। तब शाऊल ने, जिसका नाम पौलुस भी था, घोषणा की कि एलीमास कुछ समय तक अंधा रहेगा, और हाकिम ने विश्वास किया।

  10. आराधनालय में पौलुस का उपदेश

    सब्त के दिन बोलने का निमंत्रण मिलने पर पौलुस ने इस्राएल का इतिहास सुनाया और यीशु का प्रचार किया। एक सप्ताह बाद नगर के प्रायः सब लोग इकट्ठे हुए; जब कुछ लोग उनका विरोध करने लगे, तो पौलुस और बरनबास अन्यजातियों की ओर फिरे, और सताव भड़कने पर उन्हें वहाँ से निकाल दिया गया।

  11. बँटा हुआ नगर

    यहूदियों और यूनानियों की एक बड़ी भीड़ ने विश्वास किया, और प्रेरित बहुत दिन तक वहाँ रहे। परन्तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई, और जब प्रेरितों पर पथराव करने का प्रयास किया गया, तो वे वहाँ से भाग गए।

  12. लुस्त्रा में चंगाई

    पौलुस ने एक ऐसे मनुष्य को चंगा किया जो कभी चला नहीं था। भीड़ ने बरनबास को ज्यूस और पौलुस को हिर्मेस कहा, और प्रेरितों ने बड़ी कठिनाई से लोगों को बलिदान चढ़ाने से रोका।

  13. दिरबे में बहुत से चेले

    पौलुस और बरनबास ने दिरबे में सुसमाचार सुनाया और बहुत से चेले बनाए।

  14. नई कलीसियाओं को स्थिर करना

    लुस्त्रा, इकुनियुम और अन्ताकिया से होते हुए उसी मार्ग से लौटते समय उन्होंने चेलों को विश्वास में बने रहने के लिए उत्साहित किया, और हर एक कलीसिया में प्राचीन ठहराए।

  15. पिरगा में वचन सुनाना

    पिसिदिया से होते हुए पंफूलिया पहुँचकर पौलुस और बरनबास ने पिरगा में वचन सुनाया।

  16. अत्तलिया से जहाज द्वारा वापसी

    पिरगा से वे अत्तलिया को गए और वहाँ से जहाज द्वारा अन्ताकिया लौट आए।

  17. कलीसिया को वृत्तांत सुनाना

    अन्ताकिया लौटकर उन्होंने कलीसिया को इकट्ठा किया और बताया कि परमेश्वर ने किस प्रकार अन्यजातियों के लिए विश्वास का द्वार खोल दिया था। वे वहाँ बहुत दिन तक रहे।

  18. अन्ताकिया में खतने पर विवाद

    यहूदिया से आए कुछ लोगों ने भाइयों को सिखाया कि यदि मूसा की रीति के अनुसार उनका खतना न हो, तो वे उद्धार नहीं पा सकते। बहुत विवाद के बाद यह ठहराया गया कि पौलुस, बरनबास और कुछ अन्य लोग इस प्रश्न को लेकर यरूशलेम में प्रेरितों और प्राचीनों के पास जाएँ।

  19. फीनीके और सामरिया से होकर

    कलीसिया ने पौलुस और बरनबास को विदा किया, और वे फीनीके और सामरिया से होते हुए अन्यजातियों के मन फिराने का समाचार सुनाते गए, जिससे सब भाइयों को बड़ा आनन्द हुआ।

  20. यरूशलेम की सभा

    यरूशलेम में विश्वासी बने कुछ फरीसियों ने कहा कि अन्यजाति विश्वासियों का खतना होना चाहिए और उन्हें मूसा की व्यवस्था माननी चाहिए। पतरस, बरनबास और पौलुस के बोलने के बाद याकूब ने यह निर्णय दिया कि जो अन्यजाति परमेश्वर की ओर फिरते हैं, उन्हें दुःख न दिया जाए; उनसे केवल इतना कहा जाए कि वे कुछ बातों से परे रहें। पत्री लेकर अन्ताकिया जाने के लिए यहूदा, जो बरसब्बास कहलाता है, और सीलास चुने गए।

  21. अन्ताकिया में पत्री का सौंपा जाना

    अन्ताकिया में संदेशवाहकों ने विश्वासियों को इकट्ठा करके पत्री सौंप दी, और विश्वासी उसके प्रोत्साहन से आनन्दित हुए। यहूदा और सीलास ने, जो भविष्यद्वक्ता थे, भाइयों को प्रोत्साहित करके स्थिर किया, और कुछ समय बाद वे शान्ति के साथ लौटने के लिए विदा किए गए; पर पौलुस और बरनबास अन्ताकिया में ही रहकर प्रभु के वचन का उपदेश देते और प्रचार करते रहे।

  22. पौलुस और बरनबास अलग हुए

    पौलुस ने सुझाव दिया कि जिन-जिन नगरों में उन्होंने प्रचार किया था, उन सब में फिर से जाएँ। यूहन्ना मरकुस को साथ ले जाने के विषय में ऐसा तीखा विवाद हुआ कि बरनबास मरकुस को लेकर जहाज से साइप्रस चला गया, जबकि पौलुस सीलास को चुनकर सीरिया और किलिकिया से होता हुआ गया।

  23. तीतुस का यरूशलेम जाना

    चौदह वर्ष के बाद पौलुस ईश्वरीय प्रकाश के अनुसार बरनबास के साथ फिर यरूशलेम गया और तीतुस को भी साथ ले गया। जिस सुसमाचार का प्रचार वह अन्यजातियों में करता था, उसे उसने एकान्त में उन लोगों के सामने रखा जो प्रतिष्ठित समझे जाते थे। तीतुस, जो यूनानी था, खतना कराने के लिए विवश नहीं किया गया।

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