शासक, अधिकारी और धर्मगुरु
क्लौदियुस लूसियास
अन्य नाम: लूसियास
यरूशलेम में रोमी सैन्य-दल का सरदार
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- घटनाएँ
- 2
- स्थान
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- यात्राएँ
संपादकीय सारांश
यरूशलेम के सैन्य-दल का सरदार, जिसने मन्दिर में मचे कोलाहल के समय पौलुस को पकड़ा, उसे महासभा के सामने खड़ा किया, और फिर पहरे में उसे फेलिक्स के पास कैसरिया भेज दिया।
पवित्रशास्त्र
यात्राएँ
1इनकी कहानी कहाँ घटित हुई
2वचन में उल्लेख
4मन्दिर में पौलुस का पकड़ा जाना
जब सात दिन पूरे होने पर थे, तब आसिया के यहूदियों ने पौलुस को मन्दिर में देखकर भीड़ को भड़काया और दावा किया कि वह यूनानियों को मन्दिर में ले आया है, क्योंकि उन्होंने इफिसुस के रहनेवाले त्रुफिमुस को उसके साथ नगर में देखा था। भीड़ पौलुस को मार डालने के लिए बाहर घसीट ले गई, परन्तु सैन्य-दल के सरदार ने सिपाहियों के साथ आकर उसे पकड़ लिया।
सीढ़ी पर पौलुस का प्रत्युत्तर
सैन्य-दल के सरदार की अनुमति से पौलुस ने इब्रानी भाषा में भीड़ से बातें कीं, और बताया कि वह किस प्रकार इस पंथ को सताता था, जब तक कि दमिश्क के निकट यीशु ने उससे बातें नहीं कीं। जब उसने अन्यजातियों के पास भेजे जाने की बात कही, तो भीड़ उसकी मृत्यु की माँग करने लगी। जब उसे कोड़े मारे जाने वाले थे, तब उसने कहा कि वह रोमी है, और उसे जाँचनेवाले पीछे हट गए।
महासभा के सामने पौलुस
सैन्य-दल के सरदार ने पौलुस को प्रधान याजकों और महासभा के सामने खड़ा किया, और हनन्याह महायाजक ने उसके मुँह पर थप्पड़ मारने की आज्ञा दी। जब पौलुस ने पुकारकर कहा कि वह फरीसी है और मरे हुओं के पुनरुत्थान के विषय में उसका मुकद्दमा हो रहा है, तो फरीसियों और सदूकियों में झगड़ा होने लगा, और सिपाही उसे जबरदस्ती गढ़ में वापस ले गए।
षड्यंत्र और पौलुस का भांजा
चालीस से अधिक लोगों ने शपथ खाई कि जब तक वे पौलुस को मार न डालें, तब तक न कुछ खाएँगे न पीएँगे, और उन्होंने घात लगाने की योजना बनाई। पौलुस के भांजे ने यह सुनकर पहले पौलुस को और फिर सैन्य-दल के सरदार को बताया। सरदार ने सिपाहियों के एक बड़े दल को आज्ञा दी कि रात को ही पौलुस को फेलिक्स राज्यपाल के पास पहुँचा दें, और इस मामले के विषय में फेलिक्स को एक चिट्ठी लिखी।