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बंदरगाह

कैसरिया

प्राचीन नाम
कैसरिया
आज का स्थान
कैसरिया (पुरातात्विक स्थल) · इज़राइल
स्थान
पहचाना हुआ स्थल

संपादकीय सारांश

समुद्र-तट पर बसा एक रोमी बंदरगाह-नगर। पौलुस अपनी दूसरी यात्रा के अंत में यहाँ उतरा, और तीसरी यात्रा के अंतिम चरण में फिलिप्पुस सुसमाचार प्रचारक के यहाँ ठहरा। बाद में उसे यहाँ पहरे में रखा गया, और यहीं उसने कैसर की दुहाई दी।

यहाँ क्या हुआ

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  1. अश्दोद से कैसरिया तक

    बपतिस्मा के बाद प्रभु का आत्मा फिलिप्पुस को उठा ले गया, और वह अश्दोद में आ निकला। वहाँ से आगे बढ़ते हुए वह कैसरिया पहुँचने तक सब नगरों में सुसमाचार सुनाता गया।

    प्रेरितों के काम में अश्दोद और कैसरिया के बीच के नगरों के नाम नहीं बताए गए।

  2. शाऊल को तरसुस भेजा गया

    जब भाइयों को पता चला कि यूनानी भाषा बोलनेवाले यहूदी शाऊल को मार डालने का यत्न कर रहे हैं, तो उन्होंने उसे कैसरिया ले जाकर तरसुस भेज दिया।

    पौलुस का मन-परिवर्तन · पड़ाव 5
  3. कुरनेलियुस का दर्शन

    कैसरिया में इतालियानी नामक सैन्य-दल का एक भक्त सूबेदार कुरनेलियुस था, जो बहुत दान देता और बराबर प्रार्थना करता था। उसने दर्शन में परमेश्वर का एक स्वर्गदूत देखा। स्वर्गदूत ने उससे कहा कि वह याफा में लोग भेजकर शमौन को बुलवा ले, जो पतरस कहलाता है और समुद्र के किनारे एक चमड़े का धन्धा करनेवाले के यहाँ ठहरा हुआ है। तब कुरनेलियुस ने अपने दो घरेलू सेवकों और एक भक्त सिपाही को भेजा।

  4. कुरनेलियुस के घर में पतरस

    पतरस कैसरिया पहुँचा, जहाँ कुरनेलियुस ने अपने कुटुम्बियों और घनिष्ठ मित्रों को इकट्ठा कर रखा था। पतरस ने उनसे कहा कि परमेश्वर किसी का पक्षपात नहीं करता, और यीशु के विषय में बताया; वह बोल ही रहा था कि पवित्र आत्मा सब सुननेवालों पर उतर आया, और पतरस ने आज्ञा दी कि उन्हें यीशु मसीह के नाम में बपतिस्मा दिया जाए।

  5. हेरोदेस की मृत्यु

    हेरोदेस ने पहरुओं को मरवा डाला और कैसरिया चला गया। जब सोर और सीदोन के लोगों ने उससे मेल की विनती की, तब उसने राजवस्त्र पहनकर भाषण दिया, और लोग पुकार उठे कि यह किसी देवता की वाणी है। परमेश्वर की महिमा न करने के कारण प्रभु के एक स्वर्गदूत ने उसे आघात पहुँचाया, और वह मर गया।

    प्रेरितों के काम के अनुसार हेरोदेस कैसरिया जाकर वहीं रहने लगा; इसके बाद भाषण और उसकी मृत्यु का वर्णन आता है, और किसी दूसरे स्थान का नाम नहीं लिया गया।

  6. कैसरिया में उतरना

    इफिसुस से जलयात्रा करके पौलुस कैसरिया में उतरा।

    दूसरी यात्रा · पड़ाव 16
  7. अगबुस की चेतावनी

    पौलुस का दल फिलिप्पुस सुसमाचार प्रचारक के यहाँ ठहरा। भविष्यद्वक्ता अगबुस ने पौलुस के कमरबन्द से अपने ही हाथ-पाँव बाँधे और कहा कि इस कमरबन्द का स्वामी यरूशलेम में बाँधा जाएगा; पौलुस ने उत्तर दिया कि वह वहाँ प्रभु यीशु के नाम के लिए मरने को तैयार है।

    तीसरी यात्रा · पड़ाव 18
  8. कैसरिया में फेलिक्स के हवाले

    सवारों ने कैसरिया पहुँचकर राज्यपाल को चिट्ठी दी और पौलुस को उसके सामने खड़ा किया। जब फेलिक्स को पता चला कि पौलुस किलिकिया का है, तो उसने कहा कि पौलुस पर दोष लगानेवालों के आने पर वह उसकी सुनवाई करेगा, और उसे हेरोदेस के किले में रखने की आज्ञा दी।

  9. फेलिक्स के सामने मुकद्दमा

    हनन्याह महायाजक कुछ प्राचीनों और तिरतुल्लुस नाम के एक वकील के साथ आया, और तिरतुल्लुस ने फेलिक्स के सामने पौलुस पर बलवा भड़काने और मन्दिर को अशुद्ध करने का यत्न करने का दोष लगाया। पौलुस ने उत्तर दिया कि वह यरूशलेम में आराधना करने और अपने लोगों के लिए दान लाने गया था। फेलिक्स ने मुकद्दमे को टाल दिया और पौलुस को पहरे में रखा।

  10. फेलिक्स और द्रुसिल्ला का पौलुस की बातें सुनना

    फेलिक्स अपनी पत्नी द्रुसिल्ला के साथ, जो यहूदी थी, आया और उसने पौलुस से मसीह यीशु पर विश्वास के विषय में सुना; पर जब पौलुस धार्मिकता, संयम और आनेवाले न्याय की चर्चा करने लगा, तो फेलिक्स ने भयभीत होकर उसे विदा कर दिया। धन पाने की आशा में फेलिक्स बार-बार उससे बातें करता रहा, और जब दो वर्ष बाद फेस्तुस उसकी जगह आया, तो फेलिक्स पौलुस को बन्दी ही छोड़ गया।

  11. पौलुस का कैसर की दुहाई देना

    कैसरिया में यरूशलेम से आए यहूदियों ने पौलुस पर बहुत से गम्भीर दोष लगाए, जिनका वे प्रमाण नहीं दे सके, और पौलुस ने कहा कि उसने न व्यवस्था के, न मन्दिर के और न कैसर के विरुद्ध कोई अपराध किया है। जब फेस्तुस ने पूछा कि क्या वह अपने मुकद्दमे के लिए यरूशलेम जाना चाहता है, तो पौलुस ने कैसर की दुहाई दी, और फेस्तुस ने कहा कि वह कैसर ही के पास जाएगा।

  12. अग्रिप्पा और बिरनीके के सामने पौलुस

    राजा अग्रिप्पा और बिरनीके कैसरिया आए, और फेस्तुस ने पौलुस को उनके सामने लाने की आज्ञा दी। पौलुस ने अपने पहले के जीवन का, विश्वासियों को सताने का और दमिश्क के मार्ग पर हुए दर्शन का वर्णन किया। बाद में वे इस बात पर सहमत हुए कि उसने मृत्यु-दण्ड या बन्धन के योग्य कुछ नहीं किया है, और अग्रिप्पा ने कहा कि यदि उसने कैसर की दुहाई न दी होती, तो वह छूट सकता था।

    गिरफ़्तारी और मुकद्दमे · पड़ाव 3
  13. सूबेदार यूलियुस के हवाले

    जब यह निश्चित हुआ कि वे जहाज से इतालिया जाएँ, तो पौलुस और कुछ अन्य बन्दियों को यूलियुस नामक एक सूबेदार के हाथ सौंप दिया गया, और वे अद्रमुत्तियुम के एक जहाज पर चढ़कर समुद्र में निकल पड़े।

    प्रेरितों के काम 27:1–2 में यह नहीं बताया गया कि जहाज किस बन्दरगाह से चला। पौलुस को कैसरिया में बन्दी बनाकर रखा गया था (प्रेरितों के काम 25:4–6), इसलिए मानचित्र पर यह यात्रा वहीं से दिखाई गई है।

    रोम की यात्रा · पड़ाव 1

यहाँ कौन-कौन था

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यहीं के निवासी

इन यात्राओं में

पवित्रशास्त्र

एटलस में आस-पास

स्थान की निश्चितता

विद्वानों में आम सहमति है कि यही वह स्थल है।

निर्देशांक
32.5000° उत्तर, 34.8917° पूर्व